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रोसड़ा में दर्दनाक हादसा: बेकाबू बालू लदे ट्रक ने तीन छात्राओं को कुचला, 10वीं की छात्रा निकिता की मौत से मचा कोहराम

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समस्तीपुर/आलम की खबर: रोसड़ा में दर्दनाक सड़क हादसे से दहला इलाका
समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडल क्षेत्र में मंगलवार की सुबह एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें 10वीं कक्षा की छात्रा निकिता कुमारी (16 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसकी दो सहेलियां नेहा और शांति गंभीर रूप से घायल हो गईं। यह हादसा एसएच-55 पर उस समय हुआ जब तीनों छात्राएं रोज की तरह सेंटर चौक स्थित कोचिंग सेंटर जा रही थीं। अचानक तेज रफ्तार और बालू से लदा 22 चक्का ट्रक अनियंत्रित होकर सामने से आया और तीनों को अपनी चपेट में ले लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक की रफ्तार इतनी तेज थी कि चालक नियंत्रण खो बैठा और सड़क पर जा रही छात्राओं को बचने का मौका तक नहीं मिला। टक्कर इतनी भीषण थी कि छात्राएं दूर जा गिरीं और ट्रक भी सड़क किनारे पलट गया। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया, जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग भारी वाहनों के लिए काफी संवेदनशील हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद रफ्तार पर कोई नियंत्रण नहीं है। इसी लापरवाही का परिणाम यह दर्दनाक हादसा है, जिसमें एक होनहार छात्रा की जान चली गई।
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने तुरंत सड़क पर बांस-बल्ला लगाकर एसएच-55 को जाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। लोगों का आरोप था कि हादसे के बाद एंबुलेंस और पुलिस की टीम करीब एक घंटे की देरी से मौके पर पहुंची, जिससे घायल छात्राओं को समय पर इलाज नहीं मिल सका।
ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि अगर समय पर मदद मिलती तो निकिता की जान बचाई जा सकती थी। इस लापरवाही ने पूरे इलाके में आक्रोश को और बढ़ा दिया। मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय मुखिया बैजनाथ शर्मा, सरपंच हरिकांत झा सहित कई जनप्रतिनिधि पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन से कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से मृतका के परिवार को उचित मुआवजा, दोषी ट्रक चालक की तत्काल गिरफ्तारी, और एसएच-55 पर स्पीड ब्रेकर व ट्रैफिक नियंत्रण व्यवस्था लागू करना शामिल था। लोगों ने साफ कहा कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, विरोध जारी रहेगा।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे ने निकिता के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। निकिता अपने माता-पिता की तीन बेटियों और दो बेटों में से एक थी। वह पढ़ाई में काफी होनहार बताई जा रही थी और रोजाना कोचिंग के लिए जाती थी। उसकी अचानक हुई मौत से मां ममता देवी का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पिता और अन्य परिजन भी गहरे सदमे में हैं।
गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और हर कोई इस घटना से स्तब्ध है। परिजनों का कहना है कि निकिता अपने सपनों को पूरा करना चाहती थी, लेकिन एक लापरवाह ट्रक चालक ने सब कुछ छीन लिया।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हालांकि, स्थानीय लोगों का गुस्सा प्रशासन की कार्यशैली पर भी देखने को मिला। लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
एसएच-55 पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार और लापरवाही लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं होने के कारण ऐसे हादसे बार-बार हो रहे हैं।
सड़क सुरक्षा पर फिर बड़ा सवाल
यह घटना एक बार फिर बिहार में सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण नहीं लगाया जा सकता? क्या कोचिंग और स्कूल जाने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है?
इस दर्दनाक हादसे ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

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